Woke Spiritual अफीम

सारे Spiritual अफीमचीयों में एक कॉमन बात यह है की क्योकि अब इनके गुरूजी/किताब/बाबा ने कह दिया है की मेरे पास आने भर से ही तुम एक अद्वितीय पथ पर निकल चुके हो तो इनकी छाती में हवा भर जाती है। बिल्कुल पहले ही मिनट से ये सामान्य व्यक्ति को बहुत नीचा करके आंकते है , कैसे ?

अब क्योकि इनका खुद कोई acquire knowledge तो कुछ होता नहीं और ना ही इन्होने दिमाग को इतनी स्वतंत्रता दी हुई होती है की वह बेसिक ऑब्जरवेशन से कुछ सीखे। इनसे किसी भी विषय पर बात कीजिये तो इनका 90% तर्क चेतना अर्थात consciousness के आस-पास बना होता है।

चेतना का इनका एक अलग ही डिस्कोर्स चल रहा है। चेतना क्या है, इनको ऐसे साधना है , यह किस प्रकार की होती है, किस प्रकार की नहीं होती है इत्यादि। इनको पूछो चेतना का फिजिकल मतलब तो बता ! तब इनके पास कोई factual बात नही होती है क्योकि इस विषय साइंटिफिक पेपर लिखने के लिए एक्सपेरिमेंट जरुरी है, वक़्त लगता है और बहुत rigorous साइंटिफिक methodology से गुजरना पड़ता है।

आप किसी न्यूरोसाइंटिस्ट से पूछो की चेतना क्या है तो वो तो कह देते है की भई Consciousness को हम अभी समझ रहे है। यह कहा है इसका क्या अस्तित्व है और क्या इसको कॉपी किया? लेकिन इस Spiritual अफीमचियौ के लिए यह बस शब्दों की गप्प है। अपने गुरु की तरह कोई बेकार सी analogy देने लगते है। फालतू पर्सनल example देते है की की आप सोचो या इमेजिन करो की ऐसा होगा तो यह सिचुएशन होगी और रिजल्ट यह आयेगा!

 बहुत सभ्य भाषा में इसको Tautological Argument कहते है जहाँ जिस बात को इनको सत्य सिद्ध करना है यह उसको पहले मानकर चलते यही की यह बात सत्य है और उसके चारो और अपने अपने तर्कों का निर्माण करते है। एक वो इस्कॉन का चमन फूल भी ऐसी आर्गूमेंट्स का जखीरा है।

हमारे यहाँ इसको गाल बजाना कहते है।

जब ये गोल डब्बे तार्किक और वैज्ञानिक बहसों में फसते है तो  यह लॉजिकल fallacy का सहारा लेते है। इनकी तीन फेमस लॉजिकल fallacy है :-

  • Appeal To Popularity (Bandwagon) Fallacy मतलब क्योकि ये सारे लोग यहाँ बाबजी के चरणों की धूल का आनंद लेने के लिये बैठे है तो ये गलत तो हो नहीं सकते है। आप तो भीड़ देखो जी भीड़ देखो।
  • Argumentum Ad Traditionem मतलब Appeal To Tradition Fallacy देखिये भईया ये जो इतने सालों से हमारा रीति रिवाज चलते आ रहे है वो गलत तो नहीं हो सकते है। अब आप बताओ की हमारे दादा परदादा कोई गलत थे ! जाति ऊंच नीच कुछ सोच समझ के ही तो बनाई होगी ?
  • Burdon of Proof Fallacy मतलब भईया मै तो हमारे गुरूजी की शक्ति को मानता हूँ और मैंने प्रेत बाधा महसूस कि है। अब आप कह रहे हो ऐसा कुछ नहीं होता है। आप करो ना Prove, आप करके तो दिखाओ ना सिद्ध नहीं होते है। Evidence तो दिखाओ ना आप की नहीं होते है।

(अबे मैं क्यों दिखाऊ गजोधर कही के मान तो तू रहा है। )


जब ये सब चमन तर्कों में हारते है तो कृष्णा Bless यू , फलाना बाबा जी bless you, तुम पे कृपा हो। मतलब हद है Condescending होने की भी ये कौनसा spiritual ज्ञान मिल गया है?

इन लोगों मन में वो सूडो-कोंसेप्ट होता है कि इस मूर्ख मनुष्य ने अभी चेतना का उच्च स्तर प्राप्त नहीं किया है। गुरूजी ने कहा है की ऊपर की तरफ आना है। प्रत्येक जन्म में एक स्तर ऊपर चेतना प्राप्त हो जाती है। तो इसको अभी बाते समझने में टाइम लगेगा क्योकि इसका Level of Consciousness मुझसे नीचे है। मुझे ये समझते हुए इस मानव पर कृपालु होना चाहिए। मुझे गुरूजी की सारी बाते समझ में आती है क्योकि मेरी फ्रीक्वेंसी तो खुद "गुरूर जी" ने सेट कर दी है।

ये लोग सामान्य व्यक्ति को ज्ञानार्जन में अपने से पिछड़ा और चाहे कोई भी हो उसको हीन ही समझते है क्योकि ये आध्यात्म और परमतत्व से मिलन के एक पथ पर चल दिए हैा अब अगला स्टेप है परम् ज्ञान, सारा नॉलेज ऑफ़ यूनिवर्स, अबे कचौरी की सी अक्ल के इतने न्यूरॉन्स है तुम्हारे दिमाग में कि तू Zettabyte times Zettabyte डेटा स्टोर कर सके ? उसको रिकॉल कर सके? और फिर recite कर सके ?

अरे मेरे वोक अंग्रेजी बाबा के चेले अगर 24 hours की हर डिटेल हिप्पोकैम्पस ने स्टोर कर ली तो कही मेन्टल asylum में पड़ा मिलेगा

मतलब गुरूजी ने इतना ब्रैनवॉश कर दिया की इनको लगता है की जैसे ही ज्ञानोदय होगा Enlightenment होगा इनके साथ भी Indiana Jones and the Kingdom of the Crystal Skull वाले क्लाइमेक्स सीन की तरह मानसिक शक्ति से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, स्टेलर फिजिक्स, फील्ड थ्योरी, एडवांस मै , टोपोलॉजी, हिस्ट्री , कल्चर सब कुछ और बाकि सारा ज्ञान प्राप्त हो जायेगा और इनको सब पता लग जायेगा बिना कुछ पढ़े या सीखे। "असि ता फुद्दू आ" क्योकि गुरूजी के ज्ञान की असलियत को हम भी जानते है।

इसीलिए सारे ब्रैनवॉश अफीमची बस लगे हुए है पैराडाइस और Utopia की खोज में और मौजूदा समाज को डिस्टोपिया बना दिया है।

-m.Dinesh      

Dinesh Mandora All rights reserved ©

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