आत्मा अमर होगी पर शरीर नश्वर है।
मौत का कुआँ और GYM शीर्षक से मैंने यह लेख मेरी फेसबुक पोस्ट के लिये नवंबर 2021 में लिखा था ,जहां मेरे एक मित्र ने बीबीसी की एक डॉक्यूमैंट्री शेयर की थी। जिसका उद्देश्य कुछ भी रहा हो पर उसकी सफलता यह रही की उसे देख आम जनमानस ने मन में "जिम को राक्षसी" जरूर मान लिया होगा। वीडियो यही था की कैसे जिम जाना आप को बीमार, बहुत बीमार बना सकता है; इतना सीरियस तो ये लोग धूम्रपान के Advertisement में भी नहीं रहते है।
बीबीसी ने इतनी जोरदार डॉक्यूमेंट्री बनाई है जैसे जिम ना हुए मौत के कुँए हो गये। वजन उठाने से मौत हो जाएगी इतना मत उठाओ, इतना व्यायाम मत करो, स्टेरॉइड लेते है सब लोग जिम में, प्रोटीन पाउडर मत खाओ, प्री वर्कआउट मत लो और भी ना जाने क्या हो जायेगा।
वैसे तो भारतीय कार्डियोवैस्क्युलर ,रेस्पिरेटरी और मेंटल हेल्थ में सबसे पिछड़े है पर व्यायाम नहीं करने के इनके पास 101 घरेलू तत्काल बहाने मिल जायेंगे।
बीबीसी यह बताना भूल गया कि जिस स्तर के भारी व्यायाम की वह बात कर रहे है उसके लिये वर्षों वर्षों की मेहनत की आवश्यकता है। यह आपके साथ तब तो बिल्कुल नही होगा जब आप महीने में 25 दिन जिम जाने में भी झींकते है और अपना बॉडी वेट का 30%-60% उठाने के लिए लगातार संघर्षरत है। वजन उठाना और तकनीक से उठाने की कला साधने में वर्षो लगते है। जिम ही नहीं हर प्रकार का ज्यादा या अति-व्यायाम आपके लिये गहन समस्या का कारण बनता है। जवान लड़के जो जल्दी बॉडी बनाने के लिये स्टेरॉइड्स(P.E.D./ Anabolic steroid) लेना शुरू कर देते है यह भी बहुत सामान्य नहीं है क्योकि फार्मा ग्रेड Steroid Cycle की कीमत 30 हजार से 2 लाख प्रति cycle है। यह कोई सामान्य 21 वर्षीय लड़का नहीं ले सकता है , खास तौर पर तब तो बिल्कुल नहीं जब न्यूनतम 1500 रूपये प्रति किलो Raw प्रोटीन पाउडर खरीदने के लिये लड़के महीने भर पैसे बचाते है और 24 से 27 ग्राम प्रोटीन प्रति सर्विंग प्राप्त कर रहे होते है।
डाइट में प्रोटीन पूरी करने का अधूरा ज्ञान पेलने वाले यह भूल जाते है की भारतीय डाइट अपने आप में ही कार्बोहायड्रेट(कार्ब्स) रिच डाइट है क्योकि उसका उद्देश्य कभी भी मसल बनाना नहीं बल्कि शरीर की ऊर्जा की पूर्ति करना रहा है ताकि दिन भर के काम खास तौर पर कृषि प्रधान देश में कृषि संबंधित कार्य कर लिये जाये। जिम जाने मतलब स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मतलब ऊर्जा की खपत करना नहीं बल्कि शरीर में मसल को अधिक से अधिक वजन सुरक्षित रूप से उठाने के लिये तैयार करना है। यह लगातार वजन उठाना आपकी मसल को रप्चर(सूक्ष्म स्तर पर तोडना) कर देता है ,और आपके द्वारा खाये जाने वाले खाने में मौजूद प्रोटीन से उस मसल की रिपेयरिंग होती है। महीनो तक यह कार्य दोहराने से न सिर्फ आप ज्यादा वजन उठा पाते हो अपितु लगातार होते प्रोटीन प्लास्टर से आपका मसल बड़ा और उभरकर दिखने लगता है। मै ऐसी सैकड़ो रिपोर्ट किसी के भी मुँह पर मारने को तैयार हू जो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के सैकड़ो फायदे गिनवा सके बशर्ते आप मुझे एक रिपोर्ट लाकर देवे जहा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का वैज्ञानिक बहिष्कार किया गया है।
दूसरा : नार्थ इंडियंस की छदम महानता की यह जिम को पश्चिम कल्चर बताते हुए योग और अन्य व्यायामों के बड़ा बखान पेलते है या दौड़ने को जबरदस्त व्यायाम बताते है। पर 1 हफ्ता 10 दिन से ज्यादा खुद कुछ नहीं करते वही दूसरी और लगातार साल भर से रोजाना नियमित जिम जाते हुए व्यक्ति के ऊपर फब्तियां कसने से नहीं चूकते है की कैसे " अरे में तेरे ये जिम काढ़ दूंगा। अभी पीटूंगा तेरे को । तेरे जैसे डोले वाले बहुत देखे इत्यादि इत्यादि। "
कारण? यही की ऐसे नमूने इस मेहनत को देख कर बौखला जाते है, बजाय अपने आप में इम्प्रूव करने और अपने आप को बेहतर करने के अपने fragile ego को बनाये रखने के लिये इन लोगों को किसी को नीचा दिखाना ज्यादा आसान रास्ता लगता है।
एक और वाक्य "पाउडर खाकर बनाई है , हमसे पूछ ले।" तो इनसे पूछना की क्यों ना तुम यह बता दो की यह पाउडर कौनसा पाउडर है ? इसमें क्या क्या मिला हुआ है ? यह आता कितने का है ? और पाउडर खाकर क्यों नहीं तुम लोग भी यह बॉडी बना लेते हो?
अगर आपको भी कार्डियो(दौड़ना, रस्सी कूद, PT) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग(बॉडीबिल्डिंग, वेटलिफ्टिंग) में फर्क समझ आता तो आप भी आधी जानकारी से किसी को भी ऐसा ही ज्ञान दोगे। योग दरअसल बॉडीवेट कार्डियो-स्ट्रेंथ ट्रेनिंग है। जैसे मुझे calisthenic और कुछ नहीं शारीरिक योग का मॉडर्न संस्करण ही लगता है। पर
कोई भी व्यायाम किसी से श्रेष्ठ नहीं क्योकि उद्देश्य अलग अलग है। जैसे एक रेसलर एक धावक से, एक धावक एक बॉक्सर से, बॉक्सर एक वेइटलिफ्टर से और एक वेइलिफ्टर एक रेसलर से श्रेष्ठ नहीं है।खेल अलग है , उद्देश्य अलग है , तरीका और तकनीक भी अलग है।
यह भेदभाव करते आपको अधिकतर वह मिलेंगे जिनकी जुबान पर नियंत्रण नहीं, कमर और कमरे में फर्क नहीं, कही गलती से व्यायाम करने की बोलो को इन मवेशियों को पसीना आने लगता है , इनका BP ऊपर नीचे हो जाता है इनकी साँसे चढ़ जाती है और तब आता है एक फिर से गरम करके दिया गया बासी सड़ा हुआ बहाना।
- यार टाइम नहीं है।
- करेंगे यार , करेंगे शुरू टाइम लगने दे।
- करूँगा भाई आगामी हफ्ते/महीने या शास्त्रार्थ महूर्त निकलवा कर करूँगा।
- अरे यार मै गया 1 वीक फिर गैप आ गया, फिर फलाना काम आ गया तो बस। अब करुंगा रुक कर शुरू।
- यार में लेट सोता हूँ , मॉर्निंग में नहीं जा पाउँगा।
- लेट आता हूँ तो इवनिंग में नहीं जा पाउँगा।
- और घर के काम भी तो है संडे को तो मॉर्निंग में उठ कर कैसे आऊंगा , एक ही तो छुट्टी है यार।
- यार में अभी 30 साल का हूँ मेरी तो उम्र निकल चुकी है।
- अरे में तो फलाना चूर्ण/नींबू और पानी/ जड़ी बूटी/संजीवनी विद्या का इस्तेमाल करता हू।
- यार अपने को ऐसा शरीर नहीं बनाना तेरे जैसा (जैसे तो तुम कल जाओगे और जाते ही 200 KG डेडलिफ्ट लगा दोगे। अरे! मेरे महाबली शिखंडी )
Tree स्लॉथ दुनिया का सबसे धीमा सबसे आलसी जीव हैं। अन्य प्रजातियां जहाँ अधिक भोजन प्राप्ति करने की दौड़ में आगे रहने के लिये विकसित हुई, बजाय इसके यह जीव विकसित हुआ ताकि कम से कम काम किया जाये। इस से ज्यादा ऊर्जा बचेगी और आराम से पडे रहने के मामले से कम खाने में बहुत काम चल जायेगा।
भारतीय भी दरअसल ऐसे ही व्यायाम के मामले में "पेड़ चिपटू स्लोथ" है।
लेकिन दरअसल यह सब मेरी नजर में निम्न और तुच्छ कारण है इनके इस एंटी-जिम व्यवहार का। इनकी मुख्य चिंता छुपी हुई है इनके कमर के नीचे, इनकी पैंट मै क्योकि कुछ मूढ बुद्धि के हिसाब से फलाने के फलाने का जानकार बहुत Gym जाता था जो कुछ खा पीकर उसका शरीर ख़तम हो गया और वो नपुंसक हो गया। तो निष्कर्ष है की बाकि सब ठीक है पर परफॉर्मेस बनी रहनी चाहिये। परफॉर्मेस बनी रहनी चाहिए चाहे बाकि के शरीर धीरे-धीरे मर ही रहा हो।
कटु सत्य यही है की भारत में 25-69 की उम्र में होने वाली मौतों में हृदय रोग से 24.8% और श्वसन सम्बंधित रोग से 10.2% मौते होती है। भारत में 77 मिलियन लोगो को डायबिटीज है यह दुनिया में 2nd हाई है। (International Diabetes Foundation Diabetes Atlas),मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित नए ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन के अनुसार, भारत स्वास्थ्य सेवा लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है, पहुंच और गुणवत्ता के मामले में चीन, श्रीलंका और बांग्लादेश से बुरी तरह पीछे है। 195 देशों में स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता की रैंकिंग में भारत 154वें स्थान पर था। एक औसत व्यसक भारतीय पुरुष (5 फ़ीट 8 इंच, 65 किलोग्राम) और महिला दोनों की ही औसत लम्बाई वापस से गिरने लगी है, वही दुनिया भर में लम्बाई बढ़ रही है। शहरी भारतीयों में मोटापा बढ़ रहा है और नार्थ इंडियन शहरी अपने ग्रामीण कॉउंटरपार्ट से 50% अधिक फैट खा रहे है। रही परफॉरमेंस की बात तो भारत, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों के पुरुषो का जननांग मापन आप गूगल पर देख सकते है। इसके बावजूद इन लोगो का Pullout game कितना weak है।
मैं आपसे जिम जाने के लिए नहीं कह रहा हूँ बस अपने शरीर का ख्याल रखे। थोड़ा व्यायाम करे। समझदार बने।
आत्मा नश्वर है,शरीर नहीं।
-m.Dinesh
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