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इतिहास से सीखा ?

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मुझे नहीं लगता है भारतीयों को अपना इतिहास लिखना भी आता है और इसीलिए जनमानस को इतिहास पढ़ना भी नहीं आता है।  ज्यादातर तो मैंने यही पाया है की किसी भी करैक्टर के बारे में बात करते समय तथाकथित भारतीय इतिहासकारों ने अधिकतर समय उनका बस mythologization ही किया है। यहाँ तक की राजा अपनी माँ के गर्भ से सीधा अपनी माता और पिता के बीच संभोग से नहीं किसी ना किसी प्रकार के Divine Intervention से ही पैदा होते है।  ये Divine इंटरवेंशन का  एक कारण  यह भी है की सामान्य बुद्धि यह समझने में विफल है की असामान्य लोग कुछ नहीं होते है।  राजा-रंक, आम- खास, चपरासी -अधिकारी, संत-शैतान सब एक ही समाज में एक साथ विचरते है और इस बात की प्रबल सम्भावना भी है की आप एक दूसरे के पड़ोसी है। 16वी सदी में जापान में एक तोयोतोमी हिदेयोशी(Toyotomi Hideyoshi) नाम का एक बड़ा सामंती राजा हुआ।  वो एक Daimyo था जो की एक बड़ा ओहदा होता है। अपने जन्म के मूल रूप से वो एक सामान्य आदमी था जिसने लार्ड ओडा नोबुनागा के पास एक सैनिक के रूप में अपना सफर शुरू किया लेकिन काबिलियत के दम पर ऊपर पंहुचा। Daimyo बनने के लिए...

वैज्ञानिक और दार्शनिक ज्ञान

दार्शनिक ज्ञान किसी भी प्रकार के ज्ञान की पराकाष्ठा है। आप किसी भी विषय का अध्ययन कर लीजिये उस विषय में आपके ज्ञान का उच्चतम स्तर आपको उस विषय के दर्शन की और लेकर जाता है। भौतिक वैज्ञानिक रियलिटी को उसके फंडामेंटल बिल्डिंग ब्लॉक तक समझना चाहते है और गणितज्ञ उसी रियलिटी को कागज पर उतार देना चाहते है। कैमिस्ट और बायोलॉजिस्ट जीवन को उसके एक-एक क्रिया कलापों और को माइक्रोस्कोप के नीचे देख लेना चाहते है वही बॉटनिस्ट दुनिया के हर पुष्प, पादप, fungi को उसका निजी नाम दे देना चाहते है। इन सब के बाद जब आप उनसे पूछते है की उनके अध्ययन का उद्देश्य क्या है तो बिना दार्शनिक हुए वो अपनी बात समझा ही नहीं सकते है क्योकि उन्होंने प्रकृति को उसके मूल रूप में देखा है। सामान्य आँखो के लिये प्रकृति एक बहुत सरल दिखने वाली सुन्दरता है पर किसी वैज्ञानिक के लिए बहुत काम्प्लेक्स और बैलेंस्ड जैविक तंत्र है जिसके भीतर असंख्य मैक्रो से माइक्रो बायोलॉजिकल मशीनों का एक विशाल इकोसिस्टम काम कर रहा है। ये जो मैंने कहा है वो बहुत उथली बात है क्योकि दर्शन ऐसा ही विषय है। दर्शन मतलब देखना तो मैं जिस तरह से देखता हूँ यह...