Rising SUN Hypothesis

USA के capitalists का क्रिकेट में अमेरिका की टीम को उतरना एक प्रयोग है। यह प्रयोग है यह देखना की एक और जहाँ MLB, NBA, NFL और NHL जिन्हे अमेरिका का बिग Four कहा जाता है उसके अपेक्षाकृत क्या साउथ एशियाई अमेरिकी जनसँख्या की जेब से भी पैसा निकला जा सकता है? यह पैसा बिग Four से नहीं उन्ही के प्रिय क्रिकेट से निकालना आसान है। आईपीएल जैसे खेल ने BCCI को फेम और पैसा दिया और भारतीयों को 12 महीने चलने वाला बड़ा सा सर्कस जिसमे वो अपना ब्रेड का मुद्दा भूल जाते है।

फ़िलहाल अमेरिका में रहे वाले साउथ एशियाई डायस्पोरा के पास क्रिकेट के नाम पर बस उनके देशो की टीम ही थी लेकिन अब उन्हें USA की क्रिकेट टीम के रूम में होनी ट्रू लॉयलिटी दिखने का एक मौका मिला है।

2023 तक USA की 332 मिलियन जनसँख्या में से दक्षिण एशियाई प्रवासियों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका) की जनसंख्या लगभग 5.4 मिलियन है अर्थात कुल जनसंख्या का लगभग 1.6% है। इन 54 लाख लोगो का एवरेज है की इनकी जेब में पैसा है और अमेरिकन पूंजीपतियों के पास विज़न है। एक दक्षिण एशियाई अमेरिकी प्रति वर्ष लगभग 123,000 डॉलर कमाता हैं, जो कि अमेरिका में एक पूर्णकालिक कर्मचारी के औसत वार्षिक वेतन, लगभग 79,850 डॉलर से काफी अधिक है जिसका कारण उच्च शिक्षा और वह क्रीम जो वीसा की छलनी में यहाँ से छन कर सीधा अमेरिका में लैंड होती हैं। इसी कारण से दक्षिण एशियाई प्रवासियों का अमेरिका में आर्थिक योगदान प्रतिवर्ष सैकड़ों अरब डॉलर के आसपास होने का तो अनुमान लगा ही सकते है। इस डायस्पोरा के पास क्वालिफिकेशन भी है और पैसा भी है बस नहीं है तो चीयर करने के लिए कोई अमेरिकन क्रिकेट टीम, जो की अब है।

ऐसा अनुमान है कि 2023-24 के दौरान NFL का राजस्व 20 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच जाएगा और आंकड़े में से 11 बिलियन डॉलर से ज़्यादा लीग के प्रसारण भागीदारों मतलब ब्रॉडकास्टिंग पार्टनर से आया है। MLB को देख लीजिये विगत वर्ष 10 बिलियन डॉलर का कारोबार उन्होने किया है। इसी प्रकार NBA का 2022 -23 का रेवेन्यू भी 10 बिलियन डॉलर के आस पास ही रहा और NHL ने भी 6 बिलियन डॉलर से ज्यादा का करोबार किया है। इस कारोबार का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमेशा प्रसारण राइट्स और sponership रहती है।

जानते है BCCI को आईपीएल से सालाना कितना कारोबार हुआ है? क्रिकेट के इस सालाना सर्कस ने विगत 2023 -24 में 2 बिलियन डॉलर का कारोबार किया है। 200 करोड़ की साउथ एशियाई भीड़ 2 बिलियन डॉलर का कारोबार कर रही है तुलनात्मक रूप से उस बाजार से जो अपनी होम टर्फ में ही 4 बड़े खेलो से लगभग 46+ बिलियन डॉलर का कारोबार कर रहा है।

अब आप समझ सकते है की मैं किस दिशा में जा रहा हूँ और मैं कौनसे प्रयोग की बात कर रहा था जो अमेरिकन बाजार कर रहा है साउथ एशियाई अमेरिकन के साथ जो कि आगे चलकर सीधा भारत में क्रिकेट के प्रसारण राइट्स के ऊपर आक्रमण करेगा।

जल्द ही आपको एक USA Cricket असोसिअशन का एक नया रूप देखने को मिलने वाला है। कुलजीत सिंह निज्जर और अर्जुन गोना जैसे व्यक्तित्व दशकों से अमेरिकन क्रिकेट में लगे है इसको main स्ट्रीम करने में और इस खेल के ये लोग फाउंडिंग पिलर है।

54 लाख जनता के भीतर क्रिकेट स्परिट जगाना इनके लिए इतना ही आसान है जितना पढ़े लिखे NRI भारतीयों में भी जातिवाद और धर्मान्धता के बीज बो देना आसान है। स्पोंसरशिप लाना कोई बड़ी बात नहीं है जब मार्किट अपना घर का हो और सुविधाओ के नाम पर, क्रिकेट के बेट , बॉल , जर्सी , जूते और यहाँ तक कि shoutout तक स्पोंसर करने के मामले में अमेरिकन पूंजीवाद बाजार का कोई सानी नहीं है। टैलंट को हाई स्कूल से स्कॉलरशिप देकर उठा लेने के मामले में आम भारतीय तो अमेरिकन समाज से कही पीछे है। या रणजी खेलने वालो को इतनी सुविधा और प्रोत्साहन नहीं मिलने वाली जितना की USA में एक हाई स्कूल टीम को मिल जायेगा।

Nike, PepsiCo, State Farm, AT&T, Tissot, Rakuten, Hennessy, Google, American Express, Verizon, Anheuser-Busch InBev, Bose, Microsoft, Visa, Gatorade, Ford, EA Sports, Budweiser, Chevrolet, Bank of America, T-Mobile, MasterCard, Taco Bell, Scotts, Adidas, Honda, Discover Financial, Geico, Tim Hortons, Enterprise, Ticketmaster, Bridgestone ये सब कंपनिया अमेरिकन बिग four के टॉप स्पोंसर है जो इन खेलो में ब्राडकास्टिंग स लेकर प्रोडक्ट प्लेस्मेंट के राइट के लिए आपस में भी प्रतिस्पर्धा करते है। सोचिये अगले क्रिकेट वर्ल्ड कप में इन कंपनियों का प्रसारण के राइट्स के लिए प्रतिस्पर्धा करना, सोचिये USA टीम के लिए स्पोंसरशिप का बजट और ये पैसा जो लगेगा उसके लिए वही जो आज BCCI कर रहा है पैसे के दम पर खेल को मोल्ड करना और वही काम USA क्रिकेट यह काम भारी बजट के साथ करने वाला है।

पैसे का भरपूर उपयोग होगा और प्रतिभा का भरपूर इमीग्रेशन , भारतीय तंत्र में जो बेहतरीन खिलाडी भाई भतीजावाद से त्रस्त होंगे वो सब जमा पूंजी लगा कर अमेरिका की तरफ रुख करने में ज्यादा समय नहीं लगायेंगे। वैसे H1B का अमेरिकन सोसाइटी और इकोनॉमी में योगदान कम नहीं है। इस कारण से एक अलग वीसा लाइन का विकास हो जाये तो कुछ अलग नहीं होगा। दुनिया भर से अगर टैलंट इकठ्ठा किया जाये तो क्या बुरा है और फिर वही टीम पाकिस्तान के गेंदबाज और श्रीलंका के बल्लेबाजों और बांग्लादेश और भारत के all rounder से मिलकर बनी हो तो?

यह तो नियम से मैंने देखा है की भारतीय जिस चीज में घमंड कर लेते है उसी चीज में मुँह की खाते है और खेल की बात करे तो खेल भावना जैसा इनमे कुछ नहीं है। जिस क्रिकेट टीम के लिए ये साल भर समर्थन करते है मैच या कप हाथ से जाते ही इनके मुँह से अभद्रता और गालियों का तेजाब फूट पड़ता है। खिलाड़ियों को उनके परिवार और धर्म से लेकर उनके निजी जीवन पर भी विष पात्र उंडेल दिए जाते है। ऐसे ही वह टीम जो जिसने अभी पहली बार अपना डेब्यू किया है इस स्तर का परफॉर्म कर रही है जैसे उन्होंने सालों से केवल इन्ही क्षणों की प्रतीक्षा की थी। सुपर 8 में उनका आना यह दिखता है की इस क्षेत्र के तथाकथित दिगज्जों के दिन अब बस भरने वाले है।

(Image added 14 Jun 2024) 

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M.Dinesh

दिनेश मंडोरा

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