भ्रष्टाचार के कारण
- व्यक्तिगत लाभ के लिए लालच, चाहे वित्तीय हो या भौतिक।
- अपने पद के कारण अपनी शक्ति और उस नियंत्रण का दुरुपयोग।
- किसी प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव।
- सामाजिक अन्याय, व्यक्ति का पालन पोषण और सामाजिक असमानता।
- भ्रष्टाचार की सामाजिक स्वीकृति और उसके प्रति एक दबी हुई सहिष्णुता
- व्यक्तिगत चरित्र और नैतिक खामियाँ (Individual character and moral imperfections)
- संस्थागत कमज़ोरियाँ (Institutional weaknesses)
- सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण (Cultural and societal perspectives)
- सत्ता की गतिशीलता और अवसरवादिता (Power dynamics and opportunism)
- व्यक्तिगत वैचारिक स्थिति (Personal ideological position)
- कर विभागों जैसी मज़बूत प्रणालियों और संस्थाओं में जहाँ आम आदमी की कौड़ी कोड़ी का हिसाब उसके मरने के बाद भी निकाल लेने की क्षमता है वहाँ बेतहाशा अत्यधिक भ्रष्ट अधिकारी होते हैं। दूसरी और बैंकिंग प्रणाली में किसी अन्य तंत्र की तुलना में शायद मज़बूत पारदर्शिता है, फिर भी प्रशासनिक अक्षमता के कारण कितने ही देशी विदेशी बैंक विफल हो गए हैं और कितने ही कगार पर खड़े है।
- शक्ति की गतिशीलता (Power dynamics and opportunism) भी निर्णायक कारक नहीं हो सकती है क्योकि जाहिर है, उच्च पदों पर बैठे लोगों में पूर्ण भ्रष्टाचार की संभावना अधिक होती है और ऐसा नहीं है वो करते नहीं है। एक संस्था इस देश में ऐसी है जिसपर लोगो की इतना अंध विश्वास है की अगर उसका नाम लिख दिया तो लोग-लुगाई मेरे घर पत्थर और पैट्रॉल बम फेंके देंगे क्योकि उनका भ्रष्टाचार बड़ा subtle लेकिन ग्रैंड स्केल पर होता है। ये दिखता नहीं है क्योकि इसके लिए सामान्य आँखो का सहारा नहीं लिया जा सकता है।
और सामाजिकता के नजरिये से क्या जनता इसीलिए भ्रष्ट है क्योकि अथॉरिटी भ्रष्ट है?
- आप हेलमेट इसीलिए नहीं पहनते क्योकि आपको पता है आप 100 -200 रूपये देकर छूट जाओगे या आप हेलमेट इसीलिए नहीं पहनते क्योकि आपको पता है कि आपको 200 रूपये लेकर छोड़ दिया जायेगा?
- आप बिजली चोरी इसीलिए रहे हो की आपको पता है कोई नहीं पकड़ेगा या इसीलिए की आपको पता है सब करते है और कोई नहीं पकड़ रहा है?
- आप ट्रैफिक नियम इसीलिए नहीं मानते हो की आपको पता है कोई नहीं मानता या फिर इसीलिए की आपको पता है की आप ही मानते हो और कोई तो नहीं मानता है?
मतलब क्या आप नियम इसीलिए तोड़ रहे हो की सब तोड़ते है या इसीलिए की आपको पता है 'सब ही तोड़ते है' या इसीलिए की सब तोड़ते है तो मैं भी तोडूंगा या इसीलिए की बस आप ही नहीं तोड़ते है Etc. Etc.
तो नियम मानने का कोई रिवॉर्ड नहीं है पर क्या तोड़ने का है? और है तो वो रिवॉर्ड क्यों चाहिए ? क्यो हेलमेट लगाने के लिये , टैक्स भरने के लिये , बिजली बचने के लिये प्रोत्साहन चाहिए? इन प्रश्नो के उत्तर कभी बाद में क्योकि लेख का भाग-1 यहाँ ख़तम हुआ अब आपके लिये एक प्रश्न :
क्या आप भ्रष्टाचार के कारण बता सकते है?
M.Dinesh
दिनेश मंडोरा
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