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Showing posts from October, 2023

नास्तिक हो या Atheist ?

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क्या तुम कभी ऐसे व्यक्ति से मिले हो जो कहता है मैं भी पहले नास्तिक था लेकिन और उसके बाद उसने जो भी कारण बताया वो मैंने सुना नहीं क्योकि मैं उठ के चला जाता हूँ। मैं ऐसे गजोधर लोगो से कोई बातचीत नहीं करता हूँ क्योकि तुम कभी भी नास्तिक नहीं थे तुम बस अपनी मोर्टल समस्याओ से ग्रसित थे। तुमने माँगा तुमको मिला नहीं तो तुम को किसी भी भगवान् पर विश्वास नहीं। ऐसा लड़कपन का धार्मिक विश्वास या श्रद्धा श्राद्ध पक्ष की तरह होती है। ग्रह बदले श्राद्ध पक्ष खत्म ! Do you really think की किसी भी भगवान को इस तरह के किसी भी विश्वास की कोई आवश्यकता है? ऐसे तथाकथित पूर्वर्ती नास्तिक के पास तर्क नहीं होते क्योकि उनकी लॉजिक और रीजनिंग में अच्छी या दोयम स्तर की ट्रेनिंग भी नहीं हुई होती है। लगभग सभी आस्तिकों, नास्तिकों, पूर्वर्ती आस्तिकों, भूतपूर्व नास्तिकों इत्यादि का जीवन चक्र Burdon of Proof लॉजिकल fallacy के भरोसें घिसट रहा होता है अर्थात मैंने तो स्टेटमेंट दे दिया है अब समस्या है कि सामने वाला स्टटेमेंट के विरोध या समर्थन में तर्क या एविडन्स प्रस्तुत करे। मैं धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूँ क्योकि ...

कसम है तुम्हे जो तुमने कभी सीखा !

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लड़कियों को Bad Boys पसंद आते है इसका Evolutionary कारण है वो कभी बाद में समझाऊंगा। एक उम्र होती है जब लड़कियों को ये नाफरमान, ढर्रे से अलग हटकर चलने वाले अजीब से कपडे पहले झगड़ालू लड़के पसंद आते है। महिलाओ को एक सेवियर (savior) सिंण्ड्रोम होता है। उन्हें लगता है कि मैं अपने प्रेम और समर्पण से इसको बदल दूंगी। ऐसा हर उम्र की महिला में होता है किसी को ज्यादा और किसी को कम पर होता है। ये सोचती है की अब क्योंकि मैं इसकी अँधेरी जिंदगी मै रोशनी की उजली किरण बनकर आ चुकी हूँ और मेरी सीमाओं से बाहर जाकर भी मैं इसको बदल दूंगी। वो लड़कियां इन Bad Boys पीछे अपना वक़्त, भावनायें और अधिकतर मामलों में अपना जिस्म समेत सर्वस्व न्यौछावर कर देती है। लेकिन क्योकि Bad Boys तो रहा Bad Boy और उसको अब जो चाहिये था वो मिल चुका है तो अब वो इस स्वघोषित रोशनी की किरण को लात मारकर इसको सेल्फ हेट और आइडेंटिटी क्राइसिस के ज्वालामुखी में गिरा देता है। यहाँ सालों तक पड़े रहे के बाद, तपने के बाद और व्यक्तित्व में परिवर्तन के बाद यह लड़की अगर इसने नफरत करना और सभी पुरुषों को एक ही रस्सी से हाँकना नहीं सीखा है तो अ...

आत्मा अमर होगी पर शरीर नश्वर है।

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  मौत का कुआँ और GYM   शीर्षक से  मैंने यह लेख मेरी फेसबुक पोस्ट के लिये नवंबर 2021 में लिखा था ,जहां मेरे एक मित्र ने बीबीसी की एक डॉक्यूमैंट्री शेयर की थी। जिसका उद्देश्य कुछ भी रहा हो पर उसकी सफलता यह रही की उसे देख आम जनमानस ने मन में "जिम को राक्षसी" जरूर मान लिया होगा। वीडियो यही था की कैसे जिम जाना आप को बीमार, बहुत बीमार बना सकता है; इतना सीरियस तो ये लोग धूम्रपान के  Advertisement  में भी नहीं रहते है। बीबीसी ने इतनी जोरदार डॉक्यूमेंट्री बनाई है जैसे जिम ना हुए मौत के कुँए हो गये। वजन उठाने से मौत हो जाएगी इतना मत उठाओ, इतना व्यायाम मत करो, स्टेरॉइड लेते है सब लोग जिम में, प्रोटीन पाउडर मत खाओ, प्री वर्कआउट मत लो और भी ना जाने क्या हो जायेगा। वैसे तो भारतीय कार्डियोवैस्क्युलर ,रेस्पिरेटरी और मेंटल हेल्थ में सबसे पिछड़े है पर व्यायाम नहीं करने के इनके पास 101 घरेलू तत्काल बहाने मिल जायेंगे। बीबीसी यह बताना भूल गया कि जिस स्तर के भारी व्यायाम की वह बात कर रहे है उसके लिये वर्षों वर्षों की मेहनत की आवश्यकता है। यह आपके साथ तब तो बिल्कुल नही होगा जब आप ...