भूतिया I.I.T.
साल भर पहले की मैंने एक Reddit पोस्ट देखी जिसमें एक यूजर ने लिखा मैं NIT में पढ़ रहा हूं और जब मैंने पहली बार यहां के शोधकर्ताओं के बारे में सुना, तो मुझे लगा की किसी भी प्रकार के छद्मविज्ञान को यहाँ पर प्रोत्साहित नहीं किया जाता होगा पर मैं गलत था।
ऐसी कई घटनाएं हुई हैं उदाहरण के लिए कुछ दिन पहले ही हमारी क्लास कैंसिल कर दी गई क्योकि प्राचीन भारतीय ज्ञान एक ऊपर व्याख्यान देने के लिये किसी अतिथि को बुलाया गया था। वह वक्ता भारद्वाज के वैमानिक शास्त्र से प्रेरित थे जिन्होंने कई दावे किये की जैसे:
- मंदिरों में बहुत ज़्यादा सकारात्मक ऊर्जा होती है अर्थात पॉजिटिव एनर्जी होती है।
- बिग बैंग से "ॐ" की ध्वनि उत्पन्न हुई थी
- हल्दी से कैंसर ठीक हो जाता है
- हनुमान चालीसा में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी बताई गई है
और सबसे चौकाने वाली बात यह थी की किसी ने उनसे कोई सवाल नहीं किया। मेरे दोस्तों ने उनकी हर बात पर यकीन कर लिया और उन्हें इस ज्ञान पर गर्व था।
They were not prepared for any criticism, and I still can't believe it.
NIT में पढ़ने वाले छात्रों का यह हाल है तो सोचिये वहाँ के प्रोफ़ेसर का क्या होगा? सोचिये की जब यह Reddit यूजर कल को वेस्ट में जायेगा और वापस से साइंटिफिक थिंकिंग में उसकी ट्रेनिंग होगी तब क्या होगा? आपके बच्चे विदेशो से जाकर ब्रेन डेड(BRAIN Dead ) नहीं होते है। ब्रेन डेड तो उनका यहाँ होता है विदेशो में जाकर उनका ब्रेन गेन होता है। उनके मरे हुए मस्तिष्क में जान आ जाती है और समझते है की कैसे systematically एजुकेशन सिस्टम ही उनकी तरक्की में सबसे बड़ा दुश्मन है।
इसीलिए भौतिकी मेडिसिन और केमिस्ट्री यहाँ तक की फील्ड मैडल एक भी भारत के वैज्ञानिक़ो को भारत में रहते हुए नहीं मिला है।
और हद यह है "ब्रेन डेड" करने की के IIT-NIT में पढ़ने वाला बच्चा कोई लॉजिकल काउंटर करने में समर्थता नहीं जाता रहा है क्योकि वह यह करना नहीं चाहता है। वह खुद भी आँख बंद करके इसको मान लेना चाहता है की जो एक साइंटिफिक अनपढ़ व्यक्ति मुझे देश के प्राचीन विज्ञान के बारे में बता रहा है वही सही है।
आज आप यूट्यूब पर जाओ तो आपको भर-भरकर अंधविश्वास फैलाते हुए पॉडकास्ट, वीडियो, astrologer और palm रीडर मिल जायेंगे। लोग इनको लाखों करोडो की संख्या में देख रहे है जैसे की सहारा देश वापस से भाग्यवादी हो गया है। दिन भर गीता गीता की रट लगाने वाले शायद गीता के कुछ पेज से आगे नहीं पढ़ पाते है इसीलिए शायद कर्म पर किये Emphasis को भी पढ़ लेना चाहिये। शायद आपको लॉजिक और रीजनिंग में ट्रेनिंग लेनी चाहिए।
कुछ दिन पहले आचार्य प्रशांत को यह कहते हुए सुना था "वेस्ट के विश्विद्यालय तीर्थ की तरह है और अगर हमारे मन में जरा भी सम्मान ज्ञान के प्रति होता तो हम वैसे ही तीर्थ हमारे यहाँ भी बनाते।"
मैं कहता हूँ चाहे तीर्थ का जो भी मतलब यह देश निकालता हो वेस्ट के विश्व विद्यालय तीर्थ तो नहीं है। तीर्थों के नाम पर इस देश ने जितना पाखंड किया है और विश्व भर में फैलाया है अगर उन्हें तीर्थ बोल देंगे तो शायद वहाँ भी यह लोग अपने झोला झंडी उठा कर लेकर चल देंगे और तीर्थ छोड़िये अगर ढंग एक प्राथमिक विद्यालय बनाने में भी हम सफल हो जाते है तो यह निश्चित है हम में ज्ञान के प्रति सम्मान और उम्मीद की किरण बाकि है।
माँ सरस्वती ज्ञान की देवी जरूर है पर मैं यह surity के साथ कह सकता हूँ की वह इस देश के शिक्षण संस्थानों में निवास नहीं करती है। उनकी कितनी ही पूजा या पुष्प अर्चना वसंत पंचमी पर इस देश के स्कूल कॉलेज या यूनिवर्सिटी कर ले पर वह उन इमारतों की तरफ नजर उठा कर भी नहीं देखती है।
सरस्वती विचरती है देश के हजारों घरो में बने हजारो छोटे-छोटे पुस्तकालयों में, हजारों पढ़ने के कमरों में और उन चर्चाओं और वार्तालापों में जहाँ एजेंडा, जिद, बहस, लड़ाई और एक दूसरे को नीचा नहीं दिखाया जाता है और जहाँ कई सारे अधजल गगरी मिलकर एक दूसरे पर ही छलक नहीं रहे होते है। सरस्वती वहाँ आसन ग्रहण करती होंगी जहाँ आपसी समझ के आधार पर समसामयिक मुद्दो पर चर्चा होती है। वरना कितनी ही महिलायें केवल इसीलिए पी.एच.डी छोड़ देती है क्योकि उनके गाइड को उनके सबमिशन से ज्यादा उनके कपड़ो के अंदर क्या है उसमे रूचि होती है।
अब अगर आप इस लेख के इस हिस्से तक आ ही गये है तो आइये आपको एक बार भारत के यूट्यूब सनातन धर्म के दर्शन करवाते है। भारत की खोज दिखाते है की कैसे यह सिद्ध पुरुषो और पुरुषिणियो का देश है जहा मंत्र मार के हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। समस्या का ऐसा समाधान तब होता है जब पेट में अब 2 रोटी जाने के बाद थाली में एक एक्स्ट्रा रोटी बच जाती है। तब एक समाज जो मॉडर्न tech का इस्तेमाल तो करता है पर दिमाग से अभी भी feudal है वो समाज उसी तकनीक का सहारा लेकर ऐसी सड़ी हुई छद्म तरक्की करता है। इसीलिए मैंने अपने एक लेख में एक बार कहा था की भारत बड़ा विकृत देश है ये आधुनिक विज्ञान और तकनीक का उपयोग अपने आप को हजार साल पीछे लेकर जाने के लिए करते है। दुनिया में ऐसे मुल्को की कमी यही है पर भारत विरला है क्योकि यहाँ इस पिछड़ेपन पर हर कदम पर आपको फर्जी गौरव और मिथ्या सम्मान दिया जायेगा।
m.दिनेश©
-Dinesh Mandora
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Bhai aap isme sudhar ke bare me kyu nhi likhye
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