कुंठा अर्थात Frustration
इन्हें लंबोदर कैसे कहे!? "ॐ लम्बोदराय नमः" कहा सार्थक हो रहा है? Image Credit : Devdutt Pattanaik Facebook page मैं धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूँ क्योकि अधार्मिक लोग गाली-गलौच पर उतर आते है। मैं तुम्हारे किसी भी भगवान, खुदा या जीसस में कोई श्रद्वा या विश्वास भी नहीं रखता हूँ। मेरी किसी भी भगवान् या परम शक्ति को लेकर को लेकर कोई निजी अवधारणा नहीं है क्योकि Gott ist tot! Gott bleibt tot! Und wir haben ihn getötet!“ -Friedrich Nietzsche (Die Fröhliche Wissenschaft) फिर भी मुझे इन मैथोलॉजिकल किरदारों और इनके विचारों को फॉलो करने वालो की हरकते देख के दुःख से ज्यादा तरसा आता है। I pity them क्योकि ये दिन पर दिन अपनी मानसिक कुंठा और हीनता सदियों पुराने सामाजिक और दार्शनिक विचारों पर आरोपित कर रहे है। ऐसे ही इन्होने बाल मन पर अपने चंचलता से चाप छोड़ देने वाले हनुमान को ऐसा रूप दे दिया की अब कारों , बाइक पर एक गुस्से से भरा हुआ चेहरा बस तुम्हे देखता है। ये कहते है ये इनका attitude है? ये इनका नहीं तुम्हारा attitude है क्योकि तुम उनसे बुद्धि और विध्या नहीं उनसे बल मांगते हो ज...