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कुंठा अर्थात Frustration

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इन्हें लंबोदर कैसे कहे!? "ॐ लम्बोदराय नमः" कहा सार्थक हो रहा है? Image Credit : Devdutt Pattanaik Facebook page  मैं धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूँ क्योकि अधार्मिक लोग गाली-गलौच पर उतर आते है। मैं तुम्हारे किसी भी भगवान, खुदा या जीसस में कोई श्रद्वा या विश्वास भी नहीं रखता हूँ। मेरी किसी भी भगवान् या परम शक्ति को लेकर को लेकर कोई निजी अवधारणा नहीं है क्योकि Gott ist tot! Gott bleibt tot! Und wir haben ihn getötet!“ -Friedrich Nietzsche (Die Fröhliche Wissenschaft) फिर भी मुझे इन मैथोलॉजिकल किरदारों और इनके विचारों को फॉलो करने वालो की हरकते देख के दुःख से ज्यादा तरसा आता है। I pity them क्योकि ये दिन पर दिन अपनी मानसिक कुंठा और हीनता सदियों पुराने सामाजिक और दार्शनिक विचारों पर आरोपित कर रहे है। ऐसे ही इन्होने बाल मन पर अपने चंचलता से चाप छोड़ देने वाले हनुमान को ऐसा रूप दे दिया की अब कारों , बाइक पर एक गुस्से से भरा हुआ चेहरा बस तुम्हे देखता है। ये कहते है ये इनका attitude है? ये इनका नहीं तुम्हारा attitude है क्योकि तुम उनसे बुद्धि और विध्या नहीं उनसे बल मांगते हो ज...

इतिहास से सीखा ?

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मुझे नहीं लगता है भारतीयों को अपना इतिहास लिखना भी आता है और इसीलिए जनमानस को इतिहास पढ़ना भी नहीं आता है।  ज्यादातर तो मैंने यही पाया है की किसी भी करैक्टर के बारे में बात करते समय तथाकथित भारतीय इतिहासकारों ने अधिकतर समय उनका बस mythologization ही किया है। यहाँ तक की राजा अपनी माँ के गर्भ से सीधा अपनी माता और पिता के बीच संभोग से नहीं किसी ना किसी प्रकार के Divine Intervention से ही पैदा होते है।  ये Divine इंटरवेंशन का  एक कारण  यह भी है की सामान्य बुद्धि यह समझने में विफल है की असामान्य लोग कुछ नहीं होते है।  राजा-रंक, आम- खास, चपरासी -अधिकारी, संत-शैतान सब एक ही समाज में एक साथ विचरते है और इस बात की प्रबल सम्भावना भी है की आप एक दूसरे के पड़ोसी है। 16वी सदी में जापान में एक तोयोतोमी हिदेयोशी(Toyotomi Hideyoshi) नाम का एक बड़ा सामंती राजा हुआ।  वो एक Daimyo था जो की एक बड़ा ओहदा होता है। अपने जन्म के मूल रूप से वो एक सामान्य आदमी था जिसने लार्ड ओडा नोबुनागा के पास एक सैनिक के रूप में अपना सफर शुरू किया लेकिन काबिलियत के दम पर ऊपर पंहुचा। Daimyo बनने के लिए...

नास्तिक हो या Atheist ?

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क्या तुम कभी ऐसे व्यक्ति से मिले हो जो कहता है मैं भी पहले नास्तिक था लेकिन और उसके बाद उसने जो भी कारण बताया वो मैंने सुना नहीं क्योकि मैं उठ के चला जाता हूँ। मैं ऐसे गजोधर लोगो से कोई बातचीत नहीं करता हूँ क्योकि तुम कभी भी नास्तिक नहीं थे तुम बस अपनी मोर्टल समस्याओ से ग्रसित थे। तुमने माँगा तुमको मिला नहीं तो तुम को किसी भी भगवान् पर विश्वास नहीं। ऐसा लड़कपन का धार्मिक विश्वास या श्रद्धा श्राद्ध पक्ष की तरह होती है। ग्रह बदले श्राद्ध पक्ष खत्म ! Do you really think की किसी भी भगवान को इस तरह के किसी भी विश्वास की कोई आवश्यकता है? ऐसे तथाकथित पूर्वर्ती नास्तिक के पास तर्क नहीं होते क्योकि उनकी लॉजिक और रीजनिंग में अच्छी या दोयम स्तर की ट्रेनिंग भी नहीं हुई होती है। लगभग सभी आस्तिकों, नास्तिकों, पूर्वर्ती आस्तिकों, भूतपूर्व नास्तिकों इत्यादि का जीवन चक्र Burdon of Proof लॉजिकल fallacy के भरोसें घिसट रहा होता है अर्थात मैंने तो स्टेटमेंट दे दिया है अब समस्या है कि सामने वाला स्टटेमेंट के विरोध या समर्थन में तर्क या एविडन्स प्रस्तुत करे। मैं धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूँ क्योकि ...

क्या विज्ञान अंधविश्वास को बढ़ावा दे सकता है?

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क्या विज्ञान अंधविश्वास को बढ़ावा दे सकता है? क्यों ना इसमें एक बात और जोड़ दी जायें की क्या विज्ञान विश्वास को बढ़ावा देता है ? बिल्कुल नहीं । विश्वास, अंधा-विश्वास, अविश्वास और कुमार विश्वास किसी का भी विज्ञान से कोई लेना देना नहीं है। हवा-पानी, जीवन-बीमारी-मृत्यु, सूर्य,चंद्रमा, मोबाइल, रेडियो तरंग,परमाणु, फोटोन इत्यादि में आप विश्वास नहीं करते हो यह सब वैज्ञानिक और प्राकृतिक सत्य है। कल को कोई विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व को ना माने तो क्या फर्क पड़ जायेगा ? उनके मानने या ना मानने से या फिर किसी के भी ना मानने से कभी कोई वैज्ञानिक तथ्य नही बदल जाता है।  कल को कोई कहे में साँप का काटा मेरे बाबा या पीर जी के दिए बीजमंत्र और ताबीज से छुवाकर सही कर दूंगा तो यह उनका व्यक्तिगत मामला है, क्या मौत विश्वास करने से  रुक जाएगी ? कैंसर फैक्ट है विश्वास नहीं। अगर किसी को अपनी माँ की बातों पर विश्वास नहीं की उसके मौजूदा पापा ही उसके पापा है तो डीएनए जाँच करवा लीजिये। अगर जांच में मैच नहीं होने पर भी मम्मी इस बात पर टिकी रहे तो वह व्यक्ति विश्वास करेगा ? या वैज्ञानिक सबूत का चुनाव ...