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भ्रष्टाचार के कारण

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जब भी मैं लोगों से भ्रष्टाचार के शीर्ष पाँच कारण बताने के लिये कहता हूँ तो वे आमतौर पर किसी पढ़ाये गये तोते की तरह वही घिसे-पिटे जवाब देते है। जैसे तोता अपने मालिक को खुश करके उनसे कुछ खाने को प्राप्त करता है। ये लोग भी वही कारण गिना कर अपने ही दिमाग की पीठ थपथपा देते है की शाबाश तुमने अच्छा जवाब दिया है। कभी कही पढ़े कुछ पांच वाक्यांश जो ये दोहराते हैं जिसमे ये अक्सर मुझे अलग-अलग क्रम में किसी बालक द्वारा सजाये कागजी मेंढक जैसे समान जवाब देते हैं की किसी व्यक्ति के भ्रष्ट व्यक्ति बनने के शीर्ष पाँच कारण निम्न हैं: व्यक्तिगत लाभ के लिए लालच, चाहे वित्तीय हो या भौतिक। अपने पद के कारण अपनी शक्ति और उस नियंत्रण का दुरुपयोग। किसी प्रभावी निगरानी, ​​पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव। सामाजिक अन्याय, व्यक्ति का पालन पोषण और सामाजिक असमानता। भ्रष्टाचार की सामाजिक स्वीकृति और उसके प्रति एक दबी हुई सहिष्णुता हालाँकि, एक समझदार व्यक्ति सभी पाँच कारणों को कई निजी उदाहरणों के माध्यम से खारिज कर सकता है। उदाहरण के लिए, पहले से ही अमीर अधिकारी और उच्च पदों पर बैठे लोग अक्सर अधिक भ्रष्ट होते हैं। दूसरी और...

भूतिया I.I.T.

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इस देश का IQ कोई एक दिन में ही नहीं गिरा है! कलेक्टिव एफर्ट है ये पोलिटिकल फिगर्स का, तथाकथित राइट विंग इनफ्लूएंसर और वो चाय की टपरी स्तरीय पॉडकास्ट को दिन भर आपके दिमाग में बस अंग्रेजो द्वारा मिलावट की गई, मुल्लों और आक्रान्तियों द्वारा जला दी गई और लेफ्ट द्वारा छुपा दी गई उस पौराणिक विद्या और ज्ञान की बकवास भरते रहे है जिसपर आपको गर्व करना चाहिए। भले ही उस ज्ञान और विद्या से आपने पिछले 500 सालो में कुछ नहीं उखाड़ा है और पिछले 1000 सालो से आप उस ज्ञान के कारण ही गुलाम रहे और 1200 सालों पहले से उसी ज्ञान की वजह से आपका सैद्धांतिक और सामाजिक पतन होना शुरू हो गया हो पर आप बस उसपर गर्व करते रहे। आप कुछ नहीं करे! कोई शोध नहीं, कोई खोज नहीं, कोई रिसर्च नहीं, कोई नया कारनामा नहीं क्योकि आप बस ऊपर गर्व करे और आपका यही गर्व पर्याप्त है आपको विश्व गुरु बनाने के लिए भले ही आपका सामाजिक ढांचा किसी विष गुरु अर्थात Poison Master जैसा क्यों ना हो जाये। इस देश को IIT में इंजीनियरिंग पढ़ने की कोई जरुरत नहीं है। समाज वैसे भी सीमित संसाधनों में कुछ काम का बना देने वाले को जुगाड़ी की उपाधि दे देता है और उस ...

Disintegrating Quora (Hindi)

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गालीदूतों की विशेषता यह होती है की यह सामान्य जीवन में नैतिकता के पपीते बड़े चाव से लोगो को खिलाते है। इस ब्रीड की जिंदगी Morality प्रीचिंग पर चलती ही क्योकि इनको एथिक्स की कोई समझ नहीं है। ये धार्मिक नहीं होते है ये डरपोक लोग होते है। इन्होने जीवन में कोई धार्मिक मूल्य आत्मसात नहीं किया होता है ना कुछ अच्छा इन्होने पढ़ा होता है। इनके ज्ञान की अधिकतर ट्रेनिंग जिस Pro पॉलटिकल आइडियोलॉजी विंग या संस्था से जुड़े होते है उसकी बैठक में ही होती है। पर मैं गालीदूतो की बात क्यों कर रहा हूँ? क्योकि गालीदूतों की खरपतवार से आज सबसे ज्यादा त्रस्त Quora हिन्दी का मंच है और मुझे इस वास्तविकता को देख देख के बड़ा आत्मक्षोभ और आंतरिक क्लेश होता है की जिस मंच से मैंने अपने आप को पहचाना , मैंने लिखना शुरू किया , मुझे इतनी अच्छी कम्यूनिटी मिली। मेरे विज्ञान और भौतिकी के सीमित समझ को मेरी मातृभाषा में लोगो तक पहुंचाने और हिंदी में अनुवाद से लेकर मौलिक लेखन तक को सभी से साझा करने का जो पहला पायदान ट्रोल और गाली बाज निकृष्टो का एक मंच बन गया है। जहाँ बिना थप्पड़ खाने से डर से अधम स्तरीय मनुष्यों ने लगभग सभी व...

ECHO Chamber

 Coming Soon . . . 

Rising SUN Hypothesis

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USA के capitalists का क्रिकेट में अमेरिका की टीम को उतरना एक प्रयोग है। यह प्रयोग है यह देखना की एक और जहाँ MLB, NBA, NFL और NHL जिन्हे अमेरिका का बिग Four कहा जाता है उसके अपेक्षाकृत क्या साउथ एशियाई अमेरिकी जनसँख्या की जेब से भी पैसा निकला जा सकता है? यह पैसा बिग Four से नहीं उन्ही के प्रिय क्रिकेट से निकालना आसान है। आईपीएल जैसे खेल ने BCCI को फेम और पैसा दिया और भारतीयों को 12 महीने चलने वाला बड़ा सा सर्कस जिसमे वो अपना ब्रेड का मुद्दा भूल जाते है। फ़िलहाल अमेरिका में रहे वाले साउथ एशियाई डायस्पोरा के पास क्रिकेट के नाम पर बस उनके देशो की टीम ही थी लेकिन अब उन्हें USA की क्रिकेट टीम के रूम में होनी ट्रू लॉयलिटी दिखने का एक मौका मिला है। 2023 तक USA की 332 मिलियन जनसँख्या में से दक्षिण एशियाई प्रवासियों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका) की जनसंख्या लगभग 5.4 मिलियन है अर्थात कुल जनसंख्या का लगभग 1.6% है। इन 54 लाख लोगो का एवरेज है की इनकी जेब में पैसा है और अमेरिकन पूंजीपतियों के पास विज़न है। एक दक्षिण एशियाई अमेरिकी प्रति वर्ष लगभग 123,000 डॉलर कमाता हैं, जो कि अमेरिका ...

Idea of long lost History

The perception of time is a very deceitful thing, and it sometimes makes even very sane minds underestimate the idea of gaps between events, therefore the gap between two or more historical events or the gaps among anthropological or natural events can be misinterpreted. Now assume an individual who claims to know something because he believes in a very provocative idea of asserting that since two different events show similar traits of behavior or pattern, then simply a vague hypothesis can be claimed as an absolute truth or an absolute statement. Humans are biologically inferior and very linear creatures when it comes to understanding the flow of time. why I said this because imagine asking a two-dimensional being about the 3D universe! it's a near impossibility for them and so for us humans too. some of the rare and great minds of mathematicians and physicists of modern human history focusing to understand higher dimensional geometry and to comprehend its complexity and to admir...

50s-60s Japanese Cinema (Opinion )

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I have observed after watching most of the mainstream Japanese action movies of the 50s that they have a very subtle idea of heroism of the individual for the greater good of society. Movies like Seven Samurai, Three Outlaw Samurai, Yojimbo, The Tale of Zatoichi (1962), specifically the work of Akira Kurosawa. I have noticed that Japanese proposed the idea of a lone warrior or a group of warriors keen to deliver justice and help people or individuals in distress. Protagonists are always carefree and homeless, have no family or background whatsoever, and even if they have a past, it was mostly long forgotten even by the individual himself. This is a very different perspective that always helps the plot progress in a certain direction without making unnecessary switches to random conversations about the heroic past of the protagonist or any flashback. It's all about the present and not about what happened in the recent but forgotten past. There is always a love interest, a woman, a d...