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Paradoxical Ouroboros

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 I do not feel any sense of accomplishment after achieving something. All I feel is a mild sense of relief that it is done. Maybe this feeling is linked to the way expectations around success or success stories have bent our minds to think. Distorted perception that now achieving an academic or financial milestone can set everything on the right track. Everything that has gone wrong is supposed to vanish within a night after a successful ball through the hoop. These expectations may or may not come more from internal pressure or external influences but I think after achieving anything, I feel that achievement to be nothing but a pointless struggle against time. A meaningless meager task that was overhyped and overrepresented through the means of individuals who have already wasted unfathomable amounts of resources achieving the same place in that rat race, and now your own wants you to conquer an already won battlefield for the sake of their own pride and preconceived notions. Your...

"The Structure of Scientific Revolutions" Simplified(Hindi)

यह लेख एक एक कठिन दार्शनिक पुस्तक का सरलीकरण है। जो आप इस लेख में पढ़ेंगे और जो आप मूल पुस्तक में पढ़ेंगे उस भाषा और Analogy में जमीन आसमान का फर्क मिलेगा क्योकि यह लेख किताब की मेरी व्यक्तिगत समझ है। जितने भी उदाहरण आप नीचे पढ़ेंगे वह सब मैंने मेरी समझ के आधार पर लिखे गए है। किताब में इन सब का कोई जिक्र नहीं है। मेरा प्रयास है की इससे पहले आप किताब पड़े अगर यह लेख  पढ़ लेते है तो आपको पुस्तक समझने में बहुत सहायता मिलेगी। - m.दिनेश ----------------------------------------  द स्ट्रक्चर ऑफ साइंटिफिक रेवोल्यूशन्स को थॉमस कुहन( Thomas S. Kuhn ) ने लिखा है। क्या लिखा है इस किताब में ? देखिए अगर आपका बैकग्राउंड S.T.E.M. नहीं है और उसमे भी आप ने कभी दर्शन, समाजशास्त्र और अन्य Interdisciplinary क्षेत्र की कोई किताब कभी नहीं पढ़ी है तो यह किताब आपके लिए नहीं है। अगर आपकी विज्ञान और उसके दर्शन में अत्यंत रूचि है, आपने दर्शन और समाजशास्त्र पढ़ा है और आप के पास पुस्तके पढ़ने की कला है तो यह किताब बिना STEM से होते हुए भी आपके लिए है। किताब की भाषा जटिल है क्योकि जैसा मैंने कहा यह STEM म...

If You Speak Less . . .

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  Disclaimer : Opinion, belief, conviction, persuasion, sentiment, and view are not fact, Discard, Scrap or slough them if you do not admire, agree, or subscribe to them. Opinions are very specific to the situation, circumstances, affairs, or condition etc.     - m.Dinesh ---------------------------- I cannot do small talk. Conversations stimulate my mind, and this is why I tend to have longer conversations on a single or interdisciplinary topic or anything that is engaging. This by default makes me the worst individual to have small talk. Conversation helps me know more about you, your ideas that you subscribe to, and lets me know more about people, their behavior, their intellect, ideas, core principles, and philosophy that you understand, which reveals your personality as a human being. Conversations on a range of topics assist you in making a clear assessment of the person. Through this assessment, you can decipher even the silence of an individual. You can know if th...

कुंठा अर्थात Frustration

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इन्हें लंबोदर कैसे कहे!? "ॐ लम्बोदराय नमः" कहा सार्थक हो रहा है? Image Credit : Devdutt Pattanaik Facebook page  मैं धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूँ क्योकि अधार्मिक लोग गाली-गलौच पर उतर आते है। मैं तुम्हारे किसी भी भगवान, खुदा या जीसस में कोई श्रद्वा या विश्वास भी नहीं रखता हूँ। मेरी किसी भी भगवान् या परम शक्ति को लेकर को लेकर कोई निजी अवधारणा नहीं है क्योकि Gott ist tot! Gott bleibt tot! Und wir haben ihn getötet!“ -Friedrich Nietzsche (Die Fröhliche Wissenschaft) फिर भी मुझे इन मैथोलॉजिकल किरदारों और इनके विचारों को फॉलो करने वालो की हरकते देख के दुःख से ज्यादा तरसा आता है। I pity them क्योकि ये दिन पर दिन अपनी मानसिक कुंठा और हीनता सदियों पुराने सामाजिक और दार्शनिक विचारों पर आरोपित कर रहे है। ऐसे ही इन्होने बाल मन पर अपने चंचलता से चाप छोड़ देने वाले हनुमान को ऐसा रूप दे दिया की अब कारों , बाइक पर एक गुस्से से भरा हुआ चेहरा बस तुम्हे देखता है। ये कहते है ये इनका attitude है? ये इनका नहीं तुम्हारा attitude है क्योकि तुम उनसे बुद्धि और विध्या नहीं उनसे बल मांगते हो ज...

भ्रष्टाचार के कारण

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जब भी मैं लोगों से भ्रष्टाचार के शीर्ष पाँच कारण बताने के लिये कहता हूँ तो वे आमतौर पर किसी पढ़ाये गये तोते की तरह वही घिसे-पिटे जवाब देते है। जैसे तोता अपने मालिक को खुश करके उनसे कुछ खाने को प्राप्त करता है। ये लोग भी वही कारण गिना कर अपने ही दिमाग की पीठ थपथपा देते है की शाबाश तुमने अच्छा जवाब दिया है। कभी कही पढ़े कुछ पांच वाक्यांश जो ये दोहराते हैं जिसमे ये अक्सर मुझे अलग-अलग क्रम में किसी बालक द्वारा सजाये कागजी मेंढक जैसे समान जवाब देते हैं की किसी व्यक्ति के भ्रष्ट व्यक्ति बनने के शीर्ष पाँच कारण निम्न हैं: व्यक्तिगत लाभ के लिए लालच, चाहे वित्तीय हो या भौतिक। अपने पद के कारण अपनी शक्ति और उस नियंत्रण का दुरुपयोग। किसी प्रभावी निगरानी, ​​पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव। सामाजिक अन्याय, व्यक्ति का पालन पोषण और सामाजिक असमानता। भ्रष्टाचार की सामाजिक स्वीकृति और उसके प्रति एक दबी हुई सहिष्णुता हालाँकि, एक समझदार व्यक्ति सभी पाँच कारणों को कई निजी उदाहरणों के माध्यम से खारिज कर सकता है। उदाहरण के लिए, पहले से ही अमीर अधिकारी और उच्च पदों पर बैठे लोग अक्सर अधिक भ्रष्ट होते हैं। दूसरी और...

भूतिया I.I.T.

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इस देश का IQ कोई एक दिन में ही नहीं गिरा है! कलेक्टिव एफर्ट है ये पोलिटिकल फिगर्स का, तथाकथित राइट विंग इनफ्लूएंसर और वो चाय की टपरी स्तरीय पॉडकास्ट को दिन भर आपके दिमाग में बस अंग्रेजो द्वारा मिलावट की गई, मुल्लों और आक्रान्तियों द्वारा जला दी गई और लेफ्ट द्वारा छुपा दी गई उस पौराणिक विद्या और ज्ञान की बकवास भरते रहे है जिसपर आपको गर्व करना चाहिए। भले ही उस ज्ञान और विद्या से आपने पिछले 500 सालो में कुछ नहीं उखाड़ा है और पिछले 1000 सालो से आप उस ज्ञान के कारण ही गुलाम रहे और 1200 सालों पहले से उसी ज्ञान की वजह से आपका सैद्धांतिक और सामाजिक पतन होना शुरू हो गया हो पर आप बस उसपर गर्व करते रहे। आप कुछ नहीं करे! कोई शोध नहीं, कोई खोज नहीं, कोई रिसर्च नहीं, कोई नया कारनामा नहीं क्योकि आप बस ऊपर गर्व करे और आपका यही गर्व पर्याप्त है आपको विश्व गुरु बनाने के लिए भले ही आपका सामाजिक ढांचा किसी विष गुरु अर्थात Poison Master जैसा क्यों ना हो जाये। इस देश को IIT में इंजीनियरिंग पढ़ने की कोई जरुरत नहीं है। समाज वैसे भी सीमित संसाधनों में कुछ काम का बना देने वाले को जुगाड़ी की उपाधि दे देता है और उस ...

Disintegrating Quora (Hindi)

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गालीदूतों की विशेषता यह होती है की यह सामान्य जीवन में नैतिकता के पपीते बड़े चाव से लोगो को खिलाते है। इस ब्रीड की जिंदगी Morality प्रीचिंग पर चलती ही क्योकि इनको एथिक्स की कोई समझ नहीं है। ये धार्मिक नहीं होते है ये डरपोक लोग होते है। इन्होने जीवन में कोई धार्मिक मूल्य आत्मसात नहीं किया होता है ना कुछ अच्छा इन्होने पढ़ा होता है। इनके ज्ञान की अधिकतर ट्रेनिंग जिस Pro पॉलटिकल आइडियोलॉजी विंग या संस्था से जुड़े होते है उसकी बैठक में ही होती है। पर मैं गालीदूतो की बात क्यों कर रहा हूँ? क्योकि गालीदूतों की खरपतवार से आज सबसे ज्यादा त्रस्त Quora हिन्दी का मंच है और मुझे इस वास्तविकता को देख देख के बड़ा आत्मक्षोभ और आंतरिक क्लेश होता है की जिस मंच से मैंने अपने आप को पहचाना , मैंने लिखना शुरू किया , मुझे इतनी अच्छी कम्यूनिटी मिली। मेरे विज्ञान और भौतिकी के सीमित समझ को मेरी मातृभाषा में लोगो तक पहुंचाने और हिंदी में अनुवाद से लेकर मौलिक लेखन तक को सभी से साझा करने का जो पहला पायदान ट्रोल और गाली बाज निकृष्टो का एक मंच बन गया है। जहाँ बिना थप्पड़ खाने से डर से अधम स्तरीय मनुष्यों ने लगभग सभी व...