Woke Spiritual अफीम
सारे Spiritual अफीमचीयों में एक कॉमन बात यह है की क्योकि अब इनके गुरूजी/किताब/बाबा ने कह दिया है की मेरे पास आने भर से ही तुम एक अद्वितीय पथ पर निकल चुके हो तो इनकी छाती में हवा भर जाती है। बिल्कुल पहले ही मिनट से ये सामान्य व्यक्ति को बहुत नीचा करके आंकते है , कैसे ? अब क्योकि इनका खुद कोई acquire knowledge तो कुछ होता नहीं और ना ही इन्होने दिमाग को इतनी स्वतंत्रता दी हुई होती है की वह बेसिक ऑब्जरवेशन से कुछ सीखे। इनसे किसी भी विषय पर बात कीजिये तो इनका 90% तर्क चेतना अर्थात consciousness के आस-पास बना होता है। चेतना का इनका एक अलग ही डिस्कोर्स चल रहा है। चेतना क्या है, इनको ऐसे साधना है , यह किस प्रकार की होती है, किस प्रकार की नहीं होती है इत्यादि। इनको पूछो चेतना का फिजिकल मतलब तो बता ! तब इनके पास कोई factual बात नही होती है क्योकि इस विषय साइंटिफिक पेपर लिखने के लिए एक्सपेरिमेंट जरुरी है, वक़्त लगता है और बहुत rigorous साइंटिफिक methodology से गुजरना पड़ता है। आप किसी न्यूरोसाइंटिस्ट से पूछो की चेतना क्या है तो वो तो कह देते है की भई Consciousness को हम अभी समझ रहे है। यह कहा है इस...